शिवभूमि सेवा समिति ने शुरू किया पर्यावरण संरक्षण अभियान, शिवभूमि में किया गया रूद्राक्ष के पौधे का रोपण 

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पौधारोपण करते हुए समाजसेवी आचार्य पुरूषोत्तम कौशिक व अन्य
पौधारोपण करते हुए समाजसेवी आचार्य पुरूषोत्तम कौशिक व अन्य

पर्यावरण संरक्षण आज की सबसे बड़ी आवश्यकता : आचार्य पुरूषोत्तम

सफीदों, (एस• के• मित्तल) : नगर के रामपुरा रोड़ स्थित शिवभूमि सेवा समिति के तत्वावधान में सोमवार को पर्यावरण संरक्षण अभियान का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि समाजसेवी आचार्य पुरूषोत्तम कौशिक ने शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजसेवी राकेश गर्ग ने की। वहीं विशिष्टातिथि के रूप में कमल सैनी व रामानन्द मौजूद रहे। कार्यक्रम का संयोजन अखिल भारतीय ब्राह्मण संसद के अध्यक्ष संजीव गौतम द्वारा किया गया। इस अवसर पर मुख्यातिथि ने शिव भूमि में वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच गवान शिव को अत्यंत प्रिय माने जाने वाले रूद्राक्ष के पौधे का रोपण करके अभियान का शुभारंभ किया। वहीं उपस्थित गण्यमान्य लोगों ने पौधारोपण के महत्व को समझते हुए इसे अपने जीवन का हिस्सा बनाने का संकल्प लिया। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि आचार्य पुरूषोत्तम कौशिक ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण आज के समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रकृति और मानव जीवन का गहरा संबंध है, जिसे नजरअंदाज करना भविष्य के लिए घातक साबित हो सकता है। उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पेड़ लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के संयोजक संजीव गौतम ने कहा कि पर्यावरण को बचाना प्रत्येक प्राणी के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पेड़-पौधे ईश्वर का अनमोल उपहार हैं, जो प्रदूषित वायु को अवशोषित कर हमें शुद्ध एवं जीवनदायी ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के खतरे को देखते हुए इस तरह के अभियान अत्यंत जरूरी हो गए हैं। उन्होंने बताया कि पर्यावरण संरक्षण सप्ताह के अंतर्गत समिति द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इसके तहत समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को आमंत्रित कर दुर्लभ एवं औषधीय महत्व वाले पौधों का रोपण करवाया जाएगा। साथ ही इन पौधों की नियमित देखभाल और संरक्षण की जिम्मेदारी भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि यह अभियान केवल औपचारिकता बनकर न रह जाए, बल्कि एक स्थायी पहल के रूप में विकसित हो। कार्यक्रम के समापन पर अतिथियों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।