सफीदों, (एस• के• मित्तल) : सफीदों के ऐतिहासिक महाराजा अग्रसैन चौक के सामने स्थित गोल चक्कर पर दूसरी प्रतिमा स्थापित करने के मामले में राष्ट्रीय कीर्ति आह्वान के राष्ट्रीय संयोजक एडवोकेट विजयपाल सिंह ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। विजयपाल सिंह ने कहा कि महाराजा अग्रसैन चौक केवल एक भौतिक स्थान नहीं, बल्कि यह शहर की सांस्कृतिक धरोहर, सामाजिक आस्था और ऐतिहासिक पहचान का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने बताया कि करीब 25 वर्ष पहले सफीदों के पुराने बस स्टैंड पर इस चौक का निर्माण अग्रवाल समाज के बुजुर्गों की पहल और सहयोग से किया गया था। उस समय समाज ने मिलकर इसे एक विशेष पहचान दी, जो आज भी उतनी ही मजबूती से कायम है। उन्होंने कहा कि इस चौक पर स्थापित महाराजा अग्रसैन की भव्य प्रतिमा वर्षों से समाज के सम्मान, विश्वास और गौरव का केंद्र बनी हुई है। यह केवल अग्रवाल समाज ही नहीं, बल्कि पूरे शहर और 36 बिरादरी के लोगों के लिए श्रद्धा का प्रतीक है। ऐसे में इस ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व वाले स्थल के सामने किसी अन्य प्रतिमा की स्थापना करना उचित नहीं माना जा सकता। एक ही स्थान पर कई प्रतिमाओं की स्थापना उस स्थान की मौलिकता और गरिमा को प्रभावित कर सकती है। इसलिए सामाजिक दृष्टि से यह अधिक उचित है कि एक चौक एक ही महापुरुष की विचारधारा और संदेशों से जुड़ा रहे। विजयपाल सिंह ने इस मामले में रचनात्मक सुझाव देते हुए कहा कि यदि प्रशासन सौंदर्यकरण के उद्देश्य से कोई कार्य करना चाहता है, तो प्रस्तावित स्थान पर महाराजा अग्रसैन के जीवन चरित्र, उनके आदर्शों और समाज के प्रति उनके योगदान को दर्शाने वाला कोई प्रतीकात्मक चिन्ह स्थापित किया जाना चाहिए। इससे न केवल चौक की मौलिक पहचान सुरक्षित रहेगी, बल्कि नई पीढ़ी को भी उनके विचारों से प्रेरणा मिलेगी। विजयपाल सिंह ने अग्रवाल समाज को आश्वासन दिया कि वे उनके साथ मजबूती से खड़े हैं।












