करोड़ों के घोटाले के आरोपों की जांच शुरू
सफीदों, (एस• के• मित्तल) : सफीदों विधानसभा के सबसे बड़े गांव मुआना में ग्राम पंचायत द्वारा पिछले चार वर्षों के दौरान कराए गए विकास कार्यों में कथित अनियमितताओं और गुणवत्ता को लेकर उठे गंभीर आरोपों के बाद शुक्रवार को एंटी करप्शन ब्यूरो की टीम मौके पर जांच के लिए पहुंची। पंचकूला से आई इस टीम का गठन विजिलेंस डीजी के निर्देशों पर किया गया। जांच टीम में एसीबी के एक्सईएन जय सिंह, एसडीओ ध्रुव, जेई अंकित सहित अन्य अधिकारी शामिल रहे। टीम ने गांव के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया और ग्रामीणों को साथ लेकर पंचायत द्वारा कराए गए विकास कार्यों को जांचा। जांच के दौरान टीम ने गांव की पांच चौपालों, खेल स्टेडियम, राजकीय आईटीआई परिसर में कराए गए मिट्टी भरत कार्य, गांव की फिरनी और विभिन्न गलियों का निरीक्षण किया। इसके अलावा उस खडोंजा प्लाटी की भी जांच की गई, जिसकी पीली ईंटों को लेकर कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल हुआ था। इस प्लाटी को लेकर ग्रामीणों ने पहले ही सवाल उठाए थे। बताया जा रहा है कि करीब 42 लाख रुपये की लागत से लगभग साढ़े तीन किलोमीटर लंबी फिरनी का निर्माण मुआना गांव से रजवाहे तक किया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई। गांव के कई लोगों ने एंटी करप्शन ब्यूरो में लिखित शिकायत देकर विकास कार्यों में बड़े स्तर पर घोटाले का आरोप लगाया है। शिकायतकर्ताओं में बजिंदर, सतपाल शर्मा, रमेश मिस्त्री, ब्लॉक समिति सदस्य राजवीर, पंचायत सदस्य अशोक, विक्रम राणा, पाल राणा, सोमपाल राणा, सतीश राणा, कर्मपाल फौजी, देवी राम, रामस्वामी और सिंगर राणा सहित कई ग्रामीण शामिल हैं। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया गया है कि गांव के खेल स्टेडियम में करीब 9.80 लाख रुपये की मिट्टी भरत दर्शाई गई है, जबकि मौके पर ऐसा कोई कार्य नहीं हुआ। इसी प्रकार राजकीय आईटीआई में लगभग 9.60 लाख रुपये का मिट्टी भरत दिखाया गया है, लेकिन वास्तविकता में वहां भी काम नहीं किया गया। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि गांव में बनाई गई खड़ोंजा प्लाटियों में निम्न गुणवत्ता की पीली ईंटों का इस्तेमाल किया गया है और उनकी चौड़ाई भी निर्धारित मानकों से कम है। इससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी हुई, बल्कि ग्रामीणों को भी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा तीन ऐसी प्लाटियों का भी उल्लेख शिकायत में किया गया है, जो कथित तौर पर निजी जमीन में बनाई गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत को निजी जमीन पर इस प्रकार के निर्माण कार्य करवाने का अधिकार नहीं है। शिकायत में दो तालाबों की खुदाई का भी जिक्र किया गया है, जिन पर लाखों रुपये खर्च दिखाए गए हैं। हालांकि ग्रामीणों का दावा है कि इन तालाबों में कोई खुदाई कार्य नहीं हुआ, जिससे फर्जी बिलिंग और गबन की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों ने साफ कहा है कि यदि इस पूरे मामले की निष्पक्ष और गहन जांच नहीं की गई, तो वे उच्च स्तर पर शिकायत करेंगे और आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं। उनका कहना है कि गांव के विकास के नाम पर अगर भ्रष्टाचार हुआ है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

क्या कहते हैं एसीबी के एक्सईएन
इस पूरे मामले पर एंटी करप्शन ब्यूरो के एक्शन जय सिंह ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें दो दिन पहले ही शिकायत प्राप्त हुई थी, जिसके बाद विजिलेंस डीजी द्वारा तुरंत जांच टीम का गठन किया गया। उन्होंने कहा कि टीम ने फिलहाल सभी संबंधित स्थलों का निरीक्षण कर लिया है और प्रारंभिक जांच पूरी कर ली गई है। जय सिंह ने आगे बताया कि अब संबंधित विभागों से विकास कार्यों के एस्टीमेट, स्वीकृति पत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज जुटाए जाएंगे। इसके बाद टीम दोबारा गांव मुआना का दौरा करेगी और जरूरत पड़ने पर निर्माण सामग्री के सैंपल भी लिए जाएंगे, ताकि गुणवत्ता की वैज्ञानिक जांच की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होगी। जांच पूरी होने के बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
क्या कहते हैं सरपंच
इस मामले में गांव के सरपंच श्याम लाल का कहना है कि उन पर ग्रामीणों द्वारा झूठे आरोप लगाए गए हैं। किसी भी विकास कार्यों में कोई धांधली नहीं हुई। गांव में विजिलेंस की टीम पहुंची। टीम गांव में विकास कार्यों की गहनता से जांच करें। वह हर प्रकार की जांच के लिए तैयार है।












