आर्य समाज का वैदिक सत्संग संपन्न

इस मौके पर आर्य समाज सफीदों के प्रधान यादविंद्र बराड़ व मंत्री संजीव मुआना ने आए हुए महानुभावों का अभिनंदन किया। अपने संबोधन में स्वामी धर्मदेव महाराज ने कहा कि वेद केवल धार्मिक ग्रंथ नहीं, बल्कि मानव जीवन को सही दिशा देने वाले सार्वभौमिक ज्ञान के स्रोत हैं। स्वामी धर्मदेव महाराज ने राष्ट्र और समाज के संदर्भ में महत्वपूर्ण विचार रखते हुए कहा कि जैसे मानव के शरीर और आत्मा होती है, वैसे ही किसी राष्ट्र का भी भौतिक ढांचा उसका शरीर होता है, जबकि उसकी भाषा, धर्म, संस्कृति, साहित्य और इतिहास उसकी आत्मा होते हैं। जब तक यह आत्मा सुरक्षित रहती है, तब तक राष्ट्र जीवित और प्रगतिशील बना रहता है। जैसे ही यह तत्व कमजोर होते हैं, राष्ट्र का पतन निश्चित हो जाता है। अपने संबोधन में मुख्यातिथि जितेंद्र भाटिया ने अंधविश्वास और पाखंड पर प्रहार करते हुए कहा कि इतिहास गवाह है कि जब समाज में सच्चे मार्गदर्शकों का अभाव हुआ, तब अज्ञान, अंधविश्वास और कुरीतियों ने जन्म लिया। इसके परिणामस्वरूप समाज कमजोर हुआ और देश को गुलामी जैसी विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। आज भी आधुनिकता और तकनीकी प्रगति के बावजूद समाज में अंधविश्वास और पाखंड का प्रभाव बना हुआ है, जो चिंता का विषय है। उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि वे सत्य और ज्ञान के मार्ग को अपनाएं, अंधविश्वास से दूर रहें और अपने जीवन को वैज्ञानिक सोच और वैदिक सिद्धांतों के आधार पर आगे बढ़ाएं। कार्यक्रम में भजनोपदेशक पं. नरेश दत्त आर्य ने अपने मधुर भजनों के माध्यम से उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के अंत में विशाल ऋषि लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया।












