बिलकिस बानो केस, दाहोद एसपी बोले- दोषी संपर्क में नहीं: पुलिस को नहीं उनके सरेंडर की जानकारी, SC के फैसले की कॉपी भी नहीं मिली

 

बिलकिस बानो केस के 11 दोषियों के रिहाई को सुप्रीम कोर्ट ने 8 जनवरी की रद्द कर दिया है। सभी को पुलिस के सामने सरेंडर करने का निर्देश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने 8 जनवरी को गुजरात में 2002 दंगों के दौरान बिलकिस बानो गैंगरेप के 11 दोषियों को समय से पहले जेल से रिहा करने के गुजरात सरकार के फैसले को रद्द कर दिया। साथ ही दोषियों को दो सप्ताह के भीतर जेल अधिकारियों के सामने सरेंडर करने का भी निदेश दिया था।

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एजेंसी के मुताबिक, दाहोद एसपी बलराम मीना का कहना है कि बिलकिस मामले के सभी दोषियों के सरेंडर के संबंध में पुलिस को जानकारी नहीं मिली है। साथ ही कहा कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले की कॉपी भी हमें नहीं मिली है।

एसपी ने आगे कहा कि दोषी सिंगवाड के रहने वाले हैं। यहां पर कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए 8 जनवरी की सुबह से ही पुलिस की तैनाती है, जिससे किसी तरह से माहौल नहीं बिगड़े। दोषियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। वह लोग अपने घरों पर मौजूद नहीं है। कुछ अपने रिश्तेदारों से मिलने गए हैं।

8 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा था
बिलकिस बानो केस में फैसला सुनाते वक्त जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा था कि सजा अपराध रोकने के लिए दी जाती है। पीड़ित की तकलीफ की भी चिंता करनी होगी। बेंच ने कहा कि गुजरात सरकार को रिहाई का फैसला लेने का कोई अधिकार नहीं है। उसने अपनी सत्ता और ताकत का दुरुपयोग किया है।

गुजरात सरकार दोषियों को कैसे माफ कर सकती है। सुनवाई महाराष्ट्र में हुई है तो रिहाई पर फैसला भी वहीं की सरकार करेगी। जिस राज्य में अपराधी पर मुकदमा चलाया जाता है और सजा सुनाई जाती है, उसी को दोषियों की माफी याचिका पर फैसला लेने का अधिकार है।

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इस कमेंट के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने मई 2022 में जस्टिस अजय रस्तोगी (रिटायर्ड) के उस फैसले को भी रद्द कर दिया था, जिसमें 11 दोषियों को गुजरात सरकार से शीघ्र माफी के लिए अपील करने की अनुमति दी गई थी। गुजरात सरकार ने इन्हें 15 अगस्त 2022 को रिहा कर दिया था। बेंच ने सभी 11 दोषियों को 2 सप्ताह में सरेंडर करने को कहा था।

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बिलकिस के दोषियों के खिलाफ 30 नवंबर को दाखिल की गई थी याचिका
बिलकिस के 11 दोषियों की रिहाई के खिलाफ 30 नवंबर 2022 को सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल की गई थीं। पहली याचिका में 11 दोषियों की रिहाई को चुनौती देते हुए उन्हें तुरंत वापस जेल भेजने की मांग की गई थी।

दूसरी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के मई में दिए आदेश पर विचार करने की मांग की गई थी। कोर्ट ने कहा था कि दोषियों की रिहाई पर फैसला गुजरात सरकार करेगी। बिलकिस ने कहा कि जब केस का ट्रायल महाराष्ट्र में चला था, फिर गुजरात सरकार फैसला कैसे ले सकती है? केस के सभी 11 दोषी आजादी के अमृत महोत्सव के तहत रिहा कर दिए गए थे।

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सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने बिलकिस बानो के दोषियों की रिहाई से जुड़े फैसले की शुरुआत यूनानी दार्शनिक प्लेटो की इसी थ्योरी से की थी। इसके फौरन बाद कहा था कि ‘एक महिला सम्मान की हकदार है। उसका पद या धर्म जो भी हो। क्या महिलाओं के खिलाफ जघन्य अपराधों पर सजा में छूट दी जा सकती है?’

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