डाइंग हाउस का पानी भी नालों में बहा रहे: नाले और सीवर ओवरफ्लो, सेक्टर-29 पार्ट-2 में सड़कों पर भरा गंदा पानी

सेक्टर-29 में नाले ओवरफ्लो हाेने से सड़क के किनारे भरा गंदा पानी।

नाले व सीवर के ओवरफ्लो हाेने की समस्या रिहायशी सेक्टर्स में ही नहीं, औद्याेगिक सेक्टर्स में भी है। एनजीटी की सख्ती से परेशान सेक्टर-29 पार्ट-2 के उद्यमी लोकल स्तर पर सरकारी व्यवस्था से भी परेशान हैं। यहां पर सड़कों पर नाले और सीवर का पानी ओवरफ्लो कर रहा है। जिस कारण से आने-जाने में उद्यमियों के साथ ही वर्करों को परेशानी हो रही है। सेक्टर-29 पार्ट-2 एरिया स्थित सीईटीपी (कॉमन एफ्लुएंट प्लांट) के पास मुख्य सड़क पर पानी भरा रहता है।

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सेक्टर-29 पार्ट टू में सेक्टर-29 थाने की तरफ जा रही सड़क की ग्रीन बेल्ट में ओवरफ्लाे हाे रहे नाले व सीवर का पानी भर गया है। यह पानी ग्रीन बेल्ट के साथ-साथ पास ही में खाली पड़े प्लाॅट में भी भर गया है। सीवरेज के गंदे पानी से उठ रही दुर्गंध से लाेगाें काे परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। डायर्स एसाेसिएशन के प्रधान भीम राणा ने कहा कि नगर निगम में शिकायत की लेकिन काेई सुनवाई नहीं हाे रही है।

औद्याेगिक सेक्टर-29 पार्ट-टू में 400 से ज्यादा डाइंग यूनिट्स हैं। हर यूनिट में कपड़ाें काे डाई करने का काम हाेता है। इन इंडस्ट्रियाें में तैयार माल देश के विभिन्न हिस्साें में ही नहीं विदेशाें में भी भेजा जाता है। इन यूनिट्स में हजाराें की संख्या में लेबर का आवागमन हाेता है। सीजन में अधिकतर यूनिट्स तीन-तीन शिफ्ट में चलती हैं। एसाेसिएशन के प्रधान भीम राणा ने बताया कि सेक्टर्स के सीवराें की सफाई समय न हाेने के कारण ओवरफ्लाे हाेने लगते हैं। जिस इंडस्ट्री के बाहर यह पानी भरता है ताे वह अपने ही स्तर पर सफाई करवा लेता है। पिछले कुछ दिनाें से थाने की तरफ जाने वाली सड़क पर सीवर ओवरफ्लाे हाे रहा है। इस कारण गंदा पानी ग्रीन बेल्ट व खाली पड़े प्लाॅट में भर गया है। इससे पेड़-पाैधे ताे खराब हाे ही रहे हैं साथ ही दुर्गंध के कारण वहां से गुजरना मुश्किल हाे जाता है।

उनकी तरफ से नगर निगम में शिकायत भी की गई लेकिन काेई सुनवाई नहीं हाेती है। हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) के एक्सईएन धर्मवीर ने कहा कि सीवर जाम की कोई शिकायत नहीं आई है। नाले बंद होने की समस्या हो सकती है। यह निगम के जिम्मे है।

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इधर, पेयजल की समस्या से मिल सकती है राहत
नाले बंद होने से पानी निकासी की समस्या से परेशान उद्यमियों को पेयजल की किल्लत से छुटकारा मिल सकता है। औद्योगिक सेक्टरों में पानी की सप्लाई का साधन नहीं है। इसलिए यहां पर डीप ट्यूबवेल लगाने के लिए टेंडर लगाए गए हैं। सेक्टर-29 पार्ट-1 एरिया में भी 2 डीप ट्यूबवेल लगाए जाएंगे।

इसके लिए 40.77 लाख का टेंडर लगाया गया है। सेक्टर-24 में 2 डीप ट्यूबवेल लगाए जाएंगे। इस पर 40.82 लाख खर्च होगा। सेक्टर-25 पार्ट-2 में भी दो डीप ट्यूबवेल लगाए जाएंगे, जिसके लिए 40.74 लाख का टेंडर लगाया गया है। इसी तरह से सेक्टर-40 में एक डीप ट्यूबवेल लगाए जाएंगे। इस पर 20.36 लाख रुपए खर्च होंगे।

 

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