
गर्मी के मौसम में बिजली गुल होने से पेयजल आपूर्ति भी प्रभावित हुई और लोगों को भीषण गर्मी में रात जागकर बितानी पड़ी। कुछ स्थानों पर औद्यागिक ईकाईयों व मकानों की छतें उड़ गईं, जबकि कई जगह दीवारों में दरारें आ गईं। वहीं, सफीदों के आसपास के गांवों मलिकपुर, सिंघाना, असंध रोड़ और खेड़ा खेमावती के आसपास स्थित हैचरी इकाइयों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा है। तेज तूफान के कारण इन इकाइयों की दीवारें ढह गईं, शैड गिर गए। कई इकाइयों की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें आ गईं, जिससे उनका संचालन प्रभावित हो गया है। इसके अलावा सोलर प्लेटों के उखड़ने से भी इन उद्योगों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ा है। उद्योग संचालकों का कहना है कि इस प्राकृतिक आपदा ने उन्हें लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया है। किसानों के लिए भी यह तूफान किसी आपदा से कम नहीं रहा। खेतों में रखा तूड़ा तेज हवाओं के कारण उड़ गया, जिससे पशुओं के चारे की समस्या खड़ी हो गई है। तूफान के दौरान कई स्थानों पर पेड़ उखड़कर सड़कों पर गिर गए, जिससे यातायात भी प्रभावित हुआ।

बिजली और संचार सेवाओं पर पड़े असर ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दीं। तार टूटने के कारण इंटरनेट सेवाएं भी बाधित रहीं, जिससे छात्रों, व्यापारियों और ऑनलाइन कार्य करने वालों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। प्रशासन ने सुबह होते ही हालात का जायजा लेना शुरू किया और राहत कार्य तेज किए गए। बिजली विभाग की टीमें खंभों और तारों की मरम्मत में जुटी हुई हैं। क्षेत्र के लोगों ने सरकार से मांग की है कि तूफान से प्रभावित परिवारों, किसानों और उद्योगों को जल्द से जल्द आर्थिक सहायता प्रदान की जाए।












