जीएसटी नियमों में बदलाव समय की मांग : राजेश जैन 

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एफटीआईटीआई के राष्ट्रीय सचिव राजेश जैन
एफटीआईटीआई के राष्ट्रीय सचिव राजेश जैन

जीएसटी के 9 साल, सिस्टम सरल बनाने की उठी मांग

सफीदों, (एस• के• मित्तल) : जीएसटी व्यवस्था के सफलतापूर्वक 9 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर प्रमुख उद्योगपति एवं ऑल इंडिया एफटीआईटीआई के राष्ट्रीय सचिव राजेश जैन सफीदों पहुंचे। सफीदों पहुंचने पर व्यारियों ने उनका जोरदार अभिनंदन किया। इस मौके पर व्यापारियों ने उनके समझ अनेक समस्याएं रखीं, जिनका उन्होंने निवारण करवाने का आश्वासन दिया। अपने संबोधन में राजेश जैन ने केंद्र सरकार से जीएसटी प्रणाली को और अधिक सरल, पारदर्शी तथा व्यापारी-हितैषी बनाने की मांग की है। जैन ने कहा कि पिछले नौ वर्षों में जीएसटी ने देश की कर व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव लाया है और वन नेशन, वन टैक्स की अवधारणा को मजबूत आधार प्रदान किया है। जीएसटी लागू होने के बाद कर संग्रह में लगातार उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और आज सरकार को प्रत्येक माह करोड़ों रुपये का राजस्व प्राप्त हो रहा है। यह देश की मजबूत होती अर्थव्यवस्था और करदाताओं के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। हालांकि उन्होंने कहा कि व्यापारियों को अभी भी कई व्यावहारिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है, जिन्हें दूर करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने सरकार के समक्ष दो प्रमुख सुझाव रखते हुए कहा कि जीएसटी प्रणाली को और अधिक सरल बनाया जाए तथा यदि कोई सप्लायर खरीदार से जीएसटी वसूलने के बावजूद सरकार के खाते में टैक्स जमा नहीं करता है, तो उसकी जिम्मेदारी ईमानदार खरीदार पर नहीं डाली जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि रिटर्न फाइलिंग, टैक्स स्लैब तथा कंप्लायंस प्रक्रिया को आसान बनाने से छोटे एवं मध्यम व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी। इससे अधिक लोग स्वेच्छा से कर व्यवस्था से जुड़ेंगे, व्यापार को बढ़ावा मिलेगा तथा सरकार का राजस्व भी बढ़ेगा। वर्तमान व्यवस्था में कई बार खरीदार द्वारा विधिवत टैक्स भुगतान करने के बावजूद उसका इनपुट टैक्स क्रेडिट रोक दिया जाता है, जिससे उद्योग और व्यापार प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि जिस व्यापारी ने पूरी ईमानदारी से खरीदारी की है और जीएसटी का भुगतान किया है, उसे सप्लायर की गलती की सजा नहीं मिलनी चाहिए। जिसने टैक्स जमा नहीं किया, कार्रवाई उसी के खिलाफ होनी चाहिए। राजेश जैन ने विश्वास व्यक्त किया कि जीएसटी के 10वें वर्ष में सरकार राजस्व वृद्धि के साथ-साथ ईज आफ़ डूइंग बिज़नेस को भी सर्वोच्च प्राथमिकता देगी तथा ऐसी नीतियां बनाएगी, जिससे देश का प्रत्येक छोटा-बड़ा व्यापारी जीएसटी व्यवस्था का वास्तविक लाभ प्राप्त कर सके।