राष्ट्रीय तलवारबाजी प्रतियोगिता में करनाल की बेटी ने झटका गोल्ड: तनिक्षा और शीतल अब तक जीत चुकी है 128, मेडल, बढ़ाया हरियाणा का गौरव

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गुजरात की धरती पर आयोजित 36 वीं राष्ट्रीय तलवारबाजी प्रतियोगिता में हरियाणा के राजा कर्ण की नगरी करनाल शहर की बेटी तनिक्षा ने गोल्ड झटक कर भारत वर्ष में नाम रोशन किया है। खास बात यह है कि तनिक्षा और उसकी चचेरी बहन शीतल दलाल अब तक तलवारबाजी प्रतियोगिता में अलग-अलग प्रकार के 128 मेडल हासिल कर चुकी है। पूरे हरियाणा भर से तनिक्षा उसकी बहन शीतल और अभिभावकों को लोगों के बधाई संदेश निरंतर मिल रहे है। लोगों का कहना है कि छोटी आयु में इतना बड़ा सम्मान हरियाणा को दिलाना गौरव की बात है। बातदे गुजरात में चल रही इस 36वीं नेशनल प्रतियोगिता में करनाल की झोली में दूसरा गोल्ड मेडल आया है। दो दिन पहले अनीश भनवाला ने शूटिंग में गोल्ड मेडल जीता था अब तनिक्षा ने दूसरा गोल्ड मेडल जीता है।

राष्ट्रीय तलवारबाजी प्रतियोगिता में करनाल की बेटी ने झटका गोल्ड: तनिक्षा और शीतल अब तक जीत चुकी है 128, मेडल, बढ़ाया हरियाणा का गौरव

प्रतियोगिता खिलाड़ी को बनाती है प्रतिभावान : तनिक्षा

मात्र 19 वर्ष की तनिक्षा का कहना है कि कोई भी प्रतियोगिता खिलाड़ी को प्रतिभावान बनाती है। तलवारबाजी में लड़कियां कम हिस्सा लेती है। जबकि लड़कियों को इस प्रतियोगिता के लिए अधिक से अधिक संख्या में आगे आना चाहिए। यह प्रतियोगिता लड़कियों में पुरुषों के मुकाबले शक्ति प्रदर्शन का बड़ा अवसर प्रदान करती है।

तनिक्षा और शीतल ने 128 मेडल जीत बढ़ाया हरियाणा का मान

​​​​​​​तनिक्षा और शीतल अब तक 128 मेडल जीत चुकी है। इन खिलाड़ी बहनों ने अपनी प्रतिभा से परिजनों का ही नहीं बल्कि पूरे हरियाणा का मान बढ़ाया है। छह साल में दोनों बहने राष्ट्रीय-अंतराष्ट्रीय मुकाबलों में भाग लेकर विभिन्न प्रकार के मेडल हासिल कर चुकी है। तनिक्षा और शीतल 2021 में चीन में हुई वर्ल्ड यूनिवर्सिटी चैम्पियनशिप में भाग लेकर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी है। तनिक्षा और शीतल का कहना है कि एक दिन वह ओलंपिक में गोल्ड जीत कर भारत का नाम रोशन करेंगी।

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तनिक्षा और शीतल।

तनिक्षा और शीतल।

बेटियों को फ्रांस पेरिस में दिलाई प्रशिक्षण

​​​​​​​तनिक्षा और शीतल के अच्छे खिलाड़ी बनने में परिवार का पूरा सहयोग रहा है। बेटियों को आत्मनिर्भर व अच्छा खिलाड़ी बनाने के लिए निजी खर्चे पर फ्रांस व पेरिस में प्रशिक्षण दिलवाया है, ताकि बेटियां राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल कर अपने देश व शहर का नाम रोशन करें। परिजनों ने अपनी इन बेटियों पर करीब 9 लाख रुपये खर्च कर ओलंपियन खिलाड़ियों के साथ खेलने का मौका दिया। परिजनों का कहना है कि उन्हें अपनी इन बेटियों पर नाज है और उन्हें उम्मीद है कि एक दिन ओलंपिक में उनकी ये बेटियां भारत का परचम लहराएंगी।

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छोटी सी उम्र में शुरू की तलवारबाजी

​​​​​​​तनिक्षा और शीतल ने छोटी सी उम्र में तलवारबाजी शुरू कर दी थी। दोनों बहने राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अलग-अलग प्रकार के 128 मेडल हासिल कर चुकी है। तनिक्षा के पिता सोनू खत्री ने बताया कि तनिक्षा और शीतल ने 14 साल की आयु में ही तलवारबाजी शुरू कर दी थी। दोनों जूनियर व सीनियर मुकाबलों में अब तक 128 मेडल जीत चुकी हैं। शीतल और तनिक्षा ने स्कूल टाइम से ही मेहनत करती आ रही है। अब दोनों का सपना है कि वह ओलंपिक में भारत के लिए गोल्ड लेकर आए।

बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने का रहा सपना

​​​​​​​शीतल के पिता जोगिंद्र दलाल ने बताया कि उनका सपना बेटियों को आत्मनिर्भर बनाने का है। बेटियां कमजोर नहीं होती। बेटियों को समझने की जरूरत है। आज जिस तरह का माहौल है। हमें अपनी बेटियों को अच्छी शिक्षा के साथ-साथ खेलों के लिए भी प्रेरित करना चाहिए और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना चाहिए, ताकि बेटी हर परिस्थिति का सामना कर सके।

 

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