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एस• के• मित्तल
सफीदों, नगर के राजकीय महाविद्यालय में प्लेसमेंट सेल एवं हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आत्म विकास विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मंडलीय बाल कल्याण अधिकारी रोहतक एवं राज्य नोडल अधिकारी, अनिल मलिक ने कहा कि कोई भी इंसान परिवर्तन तब तक नहीं चाहता जब तक की वर्तमान स्थिति का दर्द परिवर्तन के दर्द से अधिक ना हो।
सफीदों, नगर के राजकीय महाविद्यालय में प्लेसमेंट सेल एवं हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद के संयुक्त तत्वावधान में आत्म विकास विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए मंडलीय बाल कल्याण अधिकारी रोहतक एवं राज्य नोडल अधिकारी, अनिल मलिक ने कहा कि कोई भी इंसान परिवर्तन तब तक नहीं चाहता जब तक की वर्तमान स्थिति का दर्द परिवर्तन के दर्द से अधिक ना हो।
जरूरत है आत्म विकास की वह प्रक्रिया जिससे इंसान अपने प्रयासों के माध्यम से अपने कौशल, ज्ञान, चरित्र, स्थिति में सुधार कर सकता है। उसके लिए जरूरी है लक्ष्य निर्धारित करना। खुद से सवाल करें, करते रहे जब तक आंतरिक सच्ची आवाज ना सुनाई दे कि आप जीवन से चाहते क्या हैं। एक युवा जीवन अगर सहज, आत्म विकसित और सर्वश्रेष्ठ देने की प्रवृत्ति से परिपूर्ण है तो सफलता की संभावना बढ़ जाती है। जानने और समझने की बात यह है कि हमारी सफलता के रास्ते में अगर सबसे बड़ी बाधा कोई है तो हम स्वयं हैं। सहज बने रहने के लिए अपनी दिनचर्या की सूची बनाएं, उन चिंताओं को लिखे जो बदलाव से आपको रोक रही है, मानसिकता बदलने की आवश्यकता है तो गंभीरता से सोचें और बदलाव के लिए खुद को तैयार करें,
अपना शेड्यूल अच्छे से जांच लें कि दिन भर क्या करते रहे हैं, तत्कालिक विचारों पर कार्य करें, नए सकारात्मक परिवर्ती के लोगों से जुड़े, अधिकतम संभावित सर्जनात्मक यात्रा करें। आत्म विकास के लिए जरूरी है शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक स्वास्थ्य, कृतज्ञता, लीक से हटकर सोचना, सक्रिय रहना व भावनात्मक नियंत्रण करना। यह भी समझे की श्रेष्ठता कोई हुनर नहीं एक दृष्टिकोण है जिसे विकसित करना चाहिए। इस मौके पर प्रदीप शर्मा, डा. रूचि भारद्वाज, प्रो. प्रदीप मान, रीनू व कीर्ति विशेष रूप से मौजूद थे।
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