हटकेश्वर धाम पर लगे वार्षिक मेले में पहलवानों ने दिखाया दम

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लोगों ने तीर्थ में स्नान करके की पूजा-अर्चना

एस• के • मित्तल 

सफीदों,       उपमंडल के गांव हाट में महर्षि दधिचि की तपोभूमि में स्थित हटकेश्वर धाम पर सावन के अंतिम रविवार को विशाल वार्षिक मेले का आयोजन किया गया। दूर दराज से आए हजारों श्रद्धालुओं यहां के पवित्र सरोवर में स्नान करके दादा तीर्थ महाराज कर पूजा-अर्चना की। शनिवार शाम से ही मंदिर प्रांगण में भजन-कीर्तन शुरू हो गया था जिसमें विभिन्न कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां देकर सभी का मन मोह लिया।

इस आयोजन में इनामी कुश्ती दंगल विशेष आकर्षण का केंद्र रही और नामी पहलवानों ने अपना दमखम दिखाया। विजेता रहे पहलवानों को नकद इनाम राशी देकर सम्मानित किया गया। वहीं मंदिर समिति ने मेले में पहुंचने वाले अतिथियों का घी-बूरा, हलवे व भोज देकर स्वागत किया। गौरतलब है कि देशभर के 68 तीर्थों की जलधारा के संगम स्थल हाट गांव के हटकेश्वर धाम पर सावन माह के अंतिम शनिवार और रविवार को प्रसिद्ध मेला लगता है। देश के 68 तीर्थों में से एक प्रमुख तीर्थ यह है। महर्षि दधिचि के रूप में दादा तीर्थ का भव्य मंदिर, बड़ा सरोवर, बाग, गौशाला, ऊंचे टीले पर बना दूधाधारी मंदिर विशेष आस्था का केंद्र हैं। तीन युद्धों की स्थली पानीपत से 40 किलोमीटर दूरी पर सफीदों क्षेत्र के हाट गांव में हटकेश्वर धाम महर्षि दधिचि की तपोस्थली है।
कवंदति है कि महाभारत काल में द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वस्थामा की मणि भी यहीं निकालकर उन्हें जिंदा छोड़ दिया था। हटकेश्वर धाम सेवक बलवान सिंह बूरा, कमेटी प्रधान बिल्लू बूरा ने बताया कि महर्षि दधिचि ने वज्र के लिए हड्डियों का दान देने से पहले यहीं पर 68 तीर्थ की जलधारा मंगवाकर उसमें स्नान किया। माना जाता है कि धाम के सरोवर में स्नान करने से 68 तीर्थों से पुण्य प्राप्त होता है
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