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एस• के• मित्तल
सफीदों, सफीदों क्षेत्र के वरिष्ठ समाजसेवी मास्टर रघुबीर शरण मघान (95) का देर रात निधन हो गया। जैसे ही उनके निधन का समाचार फैला लोग उनके निवास पर उमड़ पड़े और परिवार को ढांढस बंधाया। रविवार को उनका अंतिम संस्कार नगर के रामपुरा रोड स्थित शिवभूमि में पूरे विधिविधान से किया गया। उनके पुत्र राजकुमार मघान, प्रवीन मघान व अनिल मघान ने मुखाग्रि दी।
सफीदों, सफीदों क्षेत्र के वरिष्ठ समाजसेवी मास्टर रघुबीर शरण मघान (95) का देर रात निधन हो गया। जैसे ही उनके निधन का समाचार फैला लोग उनके निवास पर उमड़ पड़े और परिवार को ढांढस बंधाया। रविवार को उनका अंतिम संस्कार नगर के रामपुरा रोड स्थित शिवभूमि में पूरे विधिविधान से किया गया। उनके पुत्र राजकुमार मघान, प्रवीन मघान व अनिल मघान ने मुखाग्रि दी।
इस मौके पर गौसेवा आयोग के चेयरमैन श्रवण गर्ग, भाजपा प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट विजयपाल सिंह, पूर्व मंत्री बचन सिंह आर्य, पूर्व विधायक जसबीर देशवाल, पालिका चेयरपर्सन प्रतिनिधि संजय बिट्टा व पूर्व पालिकाध्यक्ष राकेश जैन सहित समाज के सैंकड़ों गण्यमान्य लोगों ने मौजूद रहकर उनको भावभीनी श्रद्धांजलि दी। गण्यमान्य लोगों ने अपने शोक संदेश में कहा कि मास्टर रघुबीर शरण का इस संसार से चले जाना अपने आप में एक युग का अंत हो गया है। मास्टर रघुबीर शरण ने अपने जीवन में हजारों बच्चों को शिक्षा प्रदान करके उनको एक नई दिशा देने का काम किया। शिक्षा दान के साथ-साथ उन्होंने संपूर्ण समाज के उत्थान के प्रयास किए। बेशक मास्टर रधुबीर शरण मघान का जन्म अग्रवाल समाज में हुआ लेकिन वे अन्य सभी समाजों की भलाई के लिए सदैव अग्रसर रहे।
इसके अलावा सफीदों की अनेक संस्थाओं को संभालते हुए समाजसेवा के अनूठे कार्य किए, जिन्हे कभी भी भुलाया नहीं जा सकता। मा. रघुबीर शरण श्री निगमबोध तीर्थ गीता विद्या मंदिर के संस्थापक, सफीदों की पहचान ऐतिहासिक महाभारतकालीन श्री नागक्षेत्र तीर्थ सुधार समिति के अध्यक्ष, रामलीला कमेटी के के अध्यक्ष, अग्रवाल औषधालय के अध्यक्ष पद को संभाला और सभी संस्थाओं का सफलतापूर्वक संचालन किया। मा. रघुबीर शरण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सबसे पुराने कार्यकर्त्ता माने जाते है।
उन्होंने आरएसएस व विश्व हिंदू परिषद के अनेक दायित्वों का निर्वहन किया। भगवान राम में विशेष श्रद्धा के परिणामस्वरूप उन्होंने अयोध्या श्री राम जन्म भूमि पर जाकर कार सेवा की। इसके साथ-साथ भगवान शिव की कांवड लाने के वाले शिवभक्तों की भी वे शिविर लगाकर विशेष सेवा किया करते थे।
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