एस• के• मित्तल
सफीदों, विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष अरविंद शर्मा ने कहा कि पूरे विश्व में सबसे पुरातन संस्कृति भारतीय संस्कृति है। भारतीय संस्कृति की धमक पूरे विश्व भर में है और पूरी दुनिया के लोग इस संस्कृति के आगे नतमस्तक है।
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वामपंथी सोच के लोग एक षडय़ंत्र के तहत परिवार व्यवस्था को नुकसान पहुंचाना चाहते हैं। समलैंगिक को विवाह को पश्चिमी संस्कृति की विकृति बताते हुए शर्मा ने कहा कि ऐसे में भारत को अन्य देशों की कुरीतियों को अपनाकर अपने दामन पर दाग नहीं लगाना चाहिए। भारत में इस प्रकार की बहस चलना ही एक दुर्भाग्य का विषय है। समलैंगिकता भारतीय संस्कृति पर सीधा प्रहार है तथा परिवार व समाज के लिए अभिशाप है। भारतीय संस्कृति में विवाह एक संस्कार है जो मानव जीवन को आगे बढ़ाने के लिए प्राकृतिक रूप से महिला पुरुष की सहज देन है।
परिवार का पालन पोषण करना और वंश वृद्धि करना विवाह का मूल अर्थ है जो समलैंगिकता के माध्यम से संभव नहीं है। समलैंगिकता को कानूनी मान्यता देना भारत देश की परंपराओं, मान्यताओं, सांस्कृतिक मूल्यों व समाज के विरुद्ध है। समलैंगिकता के विषय में संपूर्ण समाज द्वारा इसके विभिन्न पक्षों तथा परिणामों का गहन अध्ययन करने की आवश्यकता है। इस असामाजिक प्रक्रिया का समाज के हर वर्ग द्वारा विधि सम्मत ढंग से विरोध किया जाना नितांत जरूरी है।