राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक: सावरकर ऐसे क्रांतिकारी जिन्हें अंग्रेजों ने दो बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई

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​​​​राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक में ‘हमारे महापुरुष हमारी पहचान’ विषय पर विगत 4 दिनों से चल रहे कार्यक्रम के चतुर्थ दिवस गुरुवार वीर सावरकर क्रांतिकारियों की प्रेरणा पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में केविवि राजनीति विज्ञान के प्रोफेसर संतेष कुमार रहे। अतिथि के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता नरेश गोयल ने हिस्सा लिया। प्रोफेसर संतेष कुमार ने छात्रों को बताया कि वीर विनायक दामोदर सावरकर ऐसे पहले क्रांतिकारी थे। जिन्हाेंने दो आजीवन कारावास की सजा अंग्रेजों की सरकार ने दी।

राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक: सावरकर ऐसे क्रांतिकारी जिन्हें अंग्रेजों ने दो बार आजीवन कारावास की सजा सुनाई

कुमार ने कहा कि 1911 से 1922 तक हुए काला पानी की सेलुलर जेल में रहे अंग्रेज उन्हें बर्बर यातनाएं देते थे, परंतु वह कभी भी अपने पथ से विचलित नहीं हुए। उनका लक्ष्य अंग्रेजों को भारत से भगाना था। नरेश गोयल सभी छात्र छात्राओं को आह्वान किया कि वे भारत की महापुरुषों का अध्ययन करते हुए उनके दिखाए अच्छे रास्ते पर चलने का प्रयत्न करें।

जब तक हमें अपने महापुरुषों के बारे में ठीक जानकारी नहीं होगी, तब तक हमारी उनकी प्रति श्रद्धा का भाव ही ज्यादा नहीं होगा। इसलिए इतिहास के जो तक तोड़ मरोड़ कर बताया गया है। उनका सही अध्ययन न करते हुए आजादी और देश के निर्माण ने जिन जिन व्यक्तियों का योगदान है। उनका ठीक मूल्यांकन करना चाहिए। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य कैलाश पाली ने सभी अतिथियों का अभिनंदन करते हुए उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किया। इस अवसर पर बादाम सिंह, सतीश चंद्र, महेश कुमार, रेखा, पूजा, सुषमा, कुमारी प्रेमवती, अंजू लांबा, जितेंद्र सिंह, हंसराज, सुनीता देवी, कमलेश यादव, पारूल यादव, धीरज, शर्मिला कुमारी, रेखा, रजनी, पूजा, अनीता, नीलम यादव, ज्योति और रामकिशन की उपस्थित थे।

 

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