साध्वी डा. मोक्षिता बनेगी अयोध्या धाम में श्री रामलला प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव की साक्षी साध्वी डा. मोक्षिता को मिला रामलला प्राण प्रतिष्ठा अयोध्या महोत्सव का निमंत्रण

एस• के• मित्तल

सफीदों, भक्ति योग आश्रम सरनाखेड़ी के संचालक एवं आयुर्वेदाचार्य डा. शंकरानंद सरस्वती की परम शिष्या साध्वी डा. मोक्षिता को 22 जनवरी को श्री अयोध्या धाम में होने वाले श्री राम लला प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के ऐतिहासिक पल की साक्षी बनेगी। उन्होंने इस भव्य आयोजन के लिए आयोजक समिति की ओर से आधिकारिक निमंत्रण प्राप्त हो चुका है। करीब 20 दिन पूर्व एक संदेश के माध्यम से सूचना तो मिल गई थी लेकिन अब उन्हे आधिकारिक निमंत्रण पत्र प्राप्त हो चुका है।

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उनको यह निमंत्रण विश्व हिंदू परिषद केंद्रिय संगठन एवं संपर्क प्रमुख रासबिहारी ने स्वयं पहुंचकर सौंपा है। साध्वी डा. मोक्षिता ने बताया कि उनके गुरू डा. शंंकरानंद सरस्वती के परम आशीर्वाद और भगवान श्री राम की कृपा से यह संभव हो पाया है। उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था कि इस प्रकार से यह निमंत्रण प्राप्त होगा और इस होने वाले अलौलिक कार्यक्रम की गवाह बनेंगी। मेरा अहोभाग्य है कि उसे इस आयोजन में शिरकत करने का मौका मिला है और इस निमंत्रण पत्र को पाकर वे बेहद खुश हैं। उन्होंने बताया कि स्वयं उन्हें नहीं ही नहीं पता कि उन्हें यह निमंत्रण किस प्रकार से प्राप्त हुआ है लेकिन वे मानती है कि सिर्फ परमपूज्य गुरु शंकारानंद सरस्वती के आशीर्वाद व श्रीराम जी की कृपा से वे योग्य बन पाई हैं। अब वे 22 जनवरी का दिन-रात इंतजार कर रही हैं कि कब वे अयोध्या धाम के कार्यक्रम में शामिल हो और भव्य आयोजन को अपनी आंखो से देखें।

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साध्वी मोक्षिता ने बताया कि वह 19 जनवरी को ट्रेन के माध्यम से रवाना होंगी और उनके साथ महात्मा रवि भारती भी साथ जाएंगे। बता दें कि साध्वी डा. मोक्षिता विश्व हिंदू परिषद के कार्यक्रमों में अग्रिम भूमिकाओं में रही है। इसके अलावा विहिप की शाखा दुर्गावाहिनी में भी प्रदेश स्तर पर काम किया है। साध्वी मोक्षिता उड़ीसा राज्य से ताल्लुक रखती है। वर्ष 2013 में डा. शंकरानंद सरस्वती के सानिध्य में बतौर साधक घर-परिवार छोड़कर उपमंडल सफीदों के गांव सरनाखेड़ी स्थित भक्ति योग आश्रम में पहुंची थी।

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उसके उपरांत आध्यात्मिक शिक्षा-दीक्षा ग्रहण करके वर्ष 2020 के कुंभ में महज 19 वर्ष की आयु में पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा के तहत पूर्ण सन्यास धारण कर लिया था। आध्यात्मिक जगत के साथ-साथ वे स्वास्थ्य जगत में भी नाम कमा रहीं है। वे प्राकृतिक चिकित्सा के माध्यम से लोगों को आरोग्य प्रदान करने का कार्य कर रही हैं।

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