महिला अग्रवाल वैश्य समाज ने होटल फयूजन मे धूमधाम से मनाया लोहड़ी पर्व

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लोहड़ी का त्योहार शांति और खुशहाली का प्रतीक – सरोज गोयल

एस• के• मित्तल
सफीदों,    महिला अग्रवाल वैश्य समाज के तत्वावधान में नगर के होटल फयूजन मे लोहड़ी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महिला अध्यक्षा सरोज गोयल ने की। इस मौके पर मौजूद काफी तादाद में महिलाओं ने अनेक रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए गए। वैश्य समाज की महिलाओं ने दरि ए-मुंदरिए हो, तेरा कोन विचारा हो, दुल्ला भट्टी वाला हो, गई लोहड़ी वे..बना लो जोड़ी वे..जैसे पारंपरिक गीतों के साथ भंगड़ा व गिद्दा डालने के साथ-साथ अंताक्षरी व गीतों का भी जमकर लुत्फ उठाया। अनेक महिलाओं ने लोहड़ी पर्व की महता पर अपने विचार प्रस्तुत किए।
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अपने संबोधन में महिला अध्यक्षा सरोज गोयल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में त्यौहारा का बड़ा महत्व है और उन्ही महत्वपूर्ण त्यौहारों में लोहड़ी का पर्व भी है। त्योहार शांति और खुशहाली का प्रतीक है और इसे मिलजुलकर मनाने की रियासत में परंपरा रही है। उन्होंने बताया कि लोहड़ी से जुड़ी प्रमुख लोककथा दुल्ला भट्टी की है जो मुगलों के समय का एक बहादुर योद्धा था। जिसने मुगलों के बढ़ते जुल्म के खिलाफ कदम उठाया था। एक ब्राह्मण की 2 लड़कियों सुंदरी व मुंदरी के साथ इलाके का मुगल शासक जबरन शादी करना चाहता था। इस मुसीबत की घड़ी में दुल्ला भट्टी ने ब्राह्मण की मदद की और लड़के वालों को मनाकर एक जंगल में आग जलाकर सुंदरी-मुंदरी का ब्याह कराया। दुल्ले ने खुद ही उन दोनों का कन्यादान किया।
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