जुंडला मंडी में सरकारी धान खरीद घोटाला: सचिव को पकड़ने में जल्दबाजी, अब जांच के नाम पर लटकाया मामला

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हरियाणा के जिले करनाल में जुंडला अनाज मंडी में 12.70 करोड़ रुपए का धान घोटाले मामले की जांच ठंडी पड़ चुकी है। जुंडला मंडी के सेक्रेटरी पवन चोपड़ा को तो हिरासत में लेने में तेजी दिखाई लेकिन हैफेड के दो इंस्पेक्टरों को जांच तक मे शामिल नही किया गया। सरकारी धान खरीद घोटाले को जिस तरह से उजागर किया गया, इसके बाद जांच हुई, तो लग रहा था कि जांच एजेंसी किसी नजीजे पर पहुंचेगी। लेकिन अब जैसे जैसे वक्त बीत रहा है, जांच के नाम बस औपचारिकता भर हो रही है। जांच अधिकारी एक ही जवाब देते हैं, जांच जारी है। इस मामले को लेकर यूथ फॉर चेंज के अध्यक्ष वीरेंद्र राठौर ने CM को एक पत्र लिख कर मामले की जांच विजिलेंस से कराने की मांग की है।

जुंडला मंडी में सरकारी धान खरीद घोटाला: सचिव को पकड़ने में जल्दबाजी, अब जांच के नाम पर लटकाया मामला

राइस मिलों में जांच करती CM फ्लाईंग टीम की फाइल फोटो।

राइस मिलों में जांच करती CM फ्लाईंग टीम की फाइल फोटो।

सवाल नंबर एक

मंडी सचिव गिरफ्तार, लेकिन खरीद एजेंसियों के इंस्पेक्टरों पर मेहरबानी क्यों ?

घोटाले के सामने आने के 22 दिन बाद मंडी सचिव पवन चोपड़ा को गिरफ्तार किया गया। चार दिन का रिमांड लिया, बाद में उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया। जांच टीम ने खरीद एजेंसियों के इंस्पेक्टरों को भी पूछताछ के लिए नोटिस दिया था। अब उससे क्या पूछताछ हुई, पूछताछ हुई या नहीं, इस बारे में भी जांच टीम चुप्पी साध लेती है। जबकि घोटाले में जितनी गड़बड़ी मंडी सचिव की है, उतनी ही जिम्मेदारी खरीद एजेंसियों के इंस्पेक्टर की बनती है। फिर भी जांच टीम उन के प्रति नरम रवैया क्यों रख रही है?

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सवाल नंबर दो

​​​​​​​एक राइस मिलर गिरफ्तार दो तक पुलिस क्यों नहीं पहुंची?

CM फ्लाइंग टीम ने छह राइस मिलों में छापेमारी की थी, तब टीम को तीन राइस मिल में गड़बड़ी मिली थी। लेकिन एक राइस मिलर बुधराम को पुलिस ने गिरफ्तार किया। बुधराम ने ही गड़बड़ी वाले तीनो राइस मिल की जिम्मेदारी ले ली थी, लेकिन बाकी के दो राइस मिल के रिश्तेदारों के हैं। पुलिस ने उन्हें अपनी जांच में शामिल क्यों नहीं किया। यदि बुधराम ही तीनो राइस मिलों का मालिक है, तो इस एंगल पर जांच क्यों नहीं हुई? क्योंकि तब उसने पहले ही गड़बड़ी करने की प्लानिंग कर ली थी, जिसमें खरीद एजेंसियों के अधिकारियों की सीधी मिलीभगत है। क्योंकि यदि ऐसा नहीं है तो एक व्यक्ति के नाम तीन राइस मिल होने के बाद भी धान अलॉट हो रही है, लेकिन गोदामों में धान नहीं है।

राइस मिल में घान के स्टॉक की जांच करती CM फ्लाईंग की फाइल फोटो।

राइस मिल में घान के स्टॉक की जांच करती CM फ्लाईंग की फाइल फोटो।

सवाल नंबर तीन

​​​​​​​जांच पुलिस को क्यों?

जब मामला CM फ्लाइंग ने पकड़ा तो जांच जिला पुलिस को क्यों दी गई। क्यों नहीं जांच की जिम्मेदारी किसी दूसरी एजेंसी मसलन विजिलेंस या फिर स्पेशल जांच टीम को क्यों नहीं दी गई। यूथ फॉर चेंज के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेंद्र राठौर ने बताया कि जिला पुलिस के पास तो बहुत से काम होते हैं, ऐसे में इस मामले की जांच विजिलेंस को देनी चाहिए थी, या फिर स्पेशल टीम से करानी चाहिए थी। तभी इस मामले को किसी ने किसी अंजाम तक पहुंचाया जा सकता है। वीरेंद्र राठौर ने बताया कि यह मामला किसी ने किसी अंजाम तक पहुंचना चाहिए। अभी तक की जांच से लग नहीं रहा कि जांच किसी अंजाम तक पहुंच पाएगी।अनियमितता का मामला नहीं, यह बड़ा घोटाला है

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​​​​​​​यह मामला अनियमितता या लापरवाही का नहीं बल्कि सोची समझी साजिश के तहत किया गया बड़ा स्कैम है। उपरी तरीके से देखने में लग रहा है कि सरकारी धान खरीद में गड़बड़ी हुई, लेकिन यह फूड माफिया की करतूत है। जिसके तार खरीद एजेंसियों, मार्केट कमेटी, आढ़तियों और राइस मिल संचालकों के साथ जुड़े हुए हैं। इस स्कैम की जांच होनी चाहिए। यदि ऐसा नहीं होता तो निश्चित ही यह जांच भी महज एक औपचारिकता भर रहेगी। इससे ज्यादा कुछ नहीं।

राइस मिल में धान के स्टॉक की जांच करती टीम।

राइस मिल में धान के स्टॉक की जांच करती टीम।

जांच अधिकारी कह रहे डिप्टी साहब के पास फाईल

​​​​​​​इस मामले में IO जुंडला चौकी के इंचार्ज विकास कुमार से जब जांच के बारे में जानना चाहा तो उनका कहना था कि पुलिस मामले की जांच कर रही है। इस मामले की फाईल डिप्टी साहब के पास गई हुई है। जांच जारी है। जल्द ही पुलिस इस मामले का खुलासा कर देगी।

 

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