कार्वी घोटाले में BSE-NSE पर सेबी ने लगाया जुर्माना, समझें क्या है पूरा मामला और क्यों हुई यह बड़ी कार्रवाई

पूंजी बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्स बीएसई और एनएसई पर जुर्माना लगाया है. बीएसई और एनएसई पर यह जुर्माना ब्रोकरेज फर्म कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग लिमिटेड के घोटाले से जुड़ा है. सेबी के मुताबिक कार्वी द्वारा क्लाइंट्स के 2300 करोड़ रुपये की सिक्योरिटीज के गलत तरीके से इस्तेमाल को रोकने के लिए सही समय पर कोई कदम नहीं उठाया गया और मामले की कार्रवाई में ढिलाई बरती. सेबी (सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया) ने दो अलग-अलग आदेश में बीएसई पर 3 करोड़ रुपये और एनएसई पर 2 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है.

यह पूरा मामला कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग द्वारा अपने ग्राहकों की सिक्योरिटीज के दुरुपयोग से जुड़ा हुआ है. कार्वी ने अपने 95 हजार से अधिक ग्राहकों के 2300 करोड़ रुपये की सिक्योरिटीज को सिर्फ एक डीमैट खाते से गिरवी रखा गया. ब्रोकरेज फर्म ने खुद और अपने ग्रुप की कंपनियों के लिए इसे गिरवी रखकर 8 बैंकों/एनबीएफसी से 851.43 करोड़ रुपये का फंड जुटाया.

इस मामले में सेबी ने एनएसई और बीएसई के साथ मिलकर जून 2019 से जांच शुरू की. एनएसई ने एक फोरेंसिक ऑडिटर नियुक्त किया और सेबी के पास नवंबर 2019 में एक प्रारंभिक रिपोर्ट दाखिल किया. इस रिपोर्ट के आधार पर सेबी ने एक अंतरिम आदेश पास किया और फिर एक कंफर्मेटरी ऑर्डर जारी किया. 2019 के अपने आदेश में सेबी ने डिपॉजिटरीज को एनएसई की निगरानी में एक डीमैट खाते से उन सभी बेनेफिशियल ओनर्स के खाते में सिक्योरिटीज ट्रांसफर करने का आदेश दिया जिन्होंने पूरा भुगतान किया था. इसके बाद क्लाइंट्स को सिक्योरिटीज लौटाए गए. दिसंबर 2019 में नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड ने ऐलान किया था कि कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग डीमैट अकाउंट से 82559 क्लाइंट्स को सिक्योरिटीज लौटा दिए गए हैं. इसके बाद एनएसई ने नवंबर 2020 में कहा था कि कार्वी के निवेशकों के 2300 करोड़ रुपये की सिक्योरिटीज और फंड्स को सेटल कर लिया गया है. अब इस मामले में मंगलवार को सेबी ने फिर आदेश जारी कर दोनों बेंचमार्क इंडेक्स एनएसई और बीएसई पर जुर्माना लगाया है.

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सेबी ने मंगलवार (12 अप्रैल) को जारी आदेश में कहा है कि कार्वी ने बिना अधिकार के अपने ग्राहकों के पैसों का गलत इस्तेमाल किया और इस प्रकार निवेशकों, बैंकों और एनबीएफसी को हुए नुकसान के लिए कार्वी जिम्मेदार है लेकिन यह ब्रोकरेज फर्म बीएसई और एनएसई की सदस्य होने के चलते नियामकीय निगरानी में थी. इसके बावजूद इस घोटाले को पकड़ने में देरी हुई. इस वजह से सेबी ने बीएसई और एनएसई को भी जवाबदेह ठहराया है. इस देरी के लिए सेबी ने दोनों बेंचमार्क इंडेक्स पर जुर्माना लगाया है.

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