कथा में सुनाया भगवान श्रीकृष्ण के गोकुल में प्राकाट्य का वर्णन

उन्होंने कंस का वध करके लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्त करवाया और द्वारका नगरी की स्थापना की। महाभारत युद्ध में उन्होंने अर्जुन के सारथी की भूमिका निभाई और गीता का उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि जब पाप से धरती डोलने लगती है तो भगवान इस धरा पर अवतरित होते हैं। भगवान को न धन, पद व प्रतिष्ठा से नहीं बांध सकता। भगवान तो प्रेम से बंध जाते हैं। श्रीमद भागवत भक्तों को भवसागर से पार लगा देती है। श्रीमद् भागवत के पठन एवं श्रवण से भोग और मोक्ष दोनों सुलभ हो जाते हैं। मन की शुद्धि के लिए इससे बड़ा कोई साधन नहीं है। इसके श्रवण मात्र से हरि हृदय में आ विराजते हैं। भोग और मुक्ति के लिए तो एकमात्र भागवत शास्त्र ही पर्याप्त है। हजारों अश्वमेध और वाजपेय यज्ञ का फल इस कथा के श्रवण से मिलता है। इस मौके पर मा. मंशाराम मित्तल, साधू राम तायल, शिवकुमार गर्ग, महावीर तायल, श्रवण गोयल, विजय मंगला, सन्नी गर्ग, महेश तायल, पुनित मंगला, कृष्ण गोपाल मित्तल, गिरिराज तायल, राजेश गोयल सहित काफी तादाद में श्रद्धालुगण मौजूद थे।






