श्रीमद भागवत भक्तों को भवसागर से पार लगा देती है : अरविंद शास्त्री

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श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कथा व्यास अरविंद शास्त्री
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कथा में सुनाया भगवान श्रीकृष्ण के गोकुल में प्राकाट्य का वर्णन

सफीदों, (एस• के• मित्तल) : नगर के श्री गीता मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कथा व्यास अरविंद शास्त्री (चित्रकूट धाम) ने भगवान श्रीकृष्ण के गोकुल में प्राकाट्य का वर्णन करते हुए कहा कि भगवान श्री कृष्ण का जन्म मथुरा के कारागार में हुआ था और उनके पिता वसुदेव उन्हें गोकुल ले गए थे। यहीं पर भगवान कृष्ण ने अपना बचपन बिताया और अपने मामा कंस द्वारा भेजे गए कई राक्षसों का वध किया। गोकुल में रहते हुए कृष्ण ने कई बाल लीलाएं की। श्री कृष्ण ने गोकुल को कंस के लगातार बढ़ते अत्याचारों के कारण छोड़ा, क्योंकि गोकुल में रहने से उनके साथ-साथ गोकुलवासियों के लिए भी खतरा बढ़ गया था।

कथा में मौजूद श्रद्धालुगण

उन्होंने कंस का वध करके लोगों को उसके अत्याचारों से मुक्त करवाया और द्वारका नगरी की स्थापना की। महाभारत युद्ध में उन्होंने अर्जुन के सारथी की भूमिका निभाई और गीता का उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि जब पाप से धरती डोलने लगती है तो भगवान इस धरा पर अवतरित होते हैं। भगवान को न धन, पद व प्रतिष्ठा से नहीं बांध सकता। भगवान तो प्रेम से बंध जाते हैं। श्रीमद भागवत भक्तों को भवसागर से पार लगा देती है। श्रीमद् भागवत के पठन एवं श्रवण से भोग और मोक्ष दोनों सुलभ हो जाते हैं। मन की शुद्धि के लिए इससे बड़ा कोई साधन नहीं है। इसके श्रवण मात्र से हरि हृदय में आ विराजते हैं। भोग और मुक्ति के लिए तो एकमात्र भागवत शास्त्र ही पर्याप्त है। हजारों अश्वमेध और वाजपेय यज्ञ का फल इस कथा के श्रवण से मिलता है। इस मौके पर मा. मंशाराम मित्तल, साधू राम तायल, शिवकुमार गर्ग, महावीर तायल, श्रवण गोयल, विजय मंगला, सन्नी गर्ग, महेश तायल, पुनित मंगला, कृष्ण गोपाल मित्तल, गिरिराज तायल, राजेश गोयल सहित काफी तादाद में श्रद्धालुगण मौजूद थे।

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