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वरिष्ठ नागरिक मित्र मंडल ने किया सामुहिक गीता शलोकोचारण
एस• के• मित्तल
सफीदों, वरिष्ठ नागरिक मित्र मंडल के तत्वावधान में नगर के नागक्षेत्र मंदिर में गीता शलोकोचारण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. अशोक सम्राट ने की। संस्था के अध्यक्ष यशपाल सूरी ने आए हुए श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया। डा. अशोक सम्राट ने गीता जयंती के उपलक्ष्य में वरिष्ठ नागरिकों को गीता के श्लोकों का पाठ करवाया। अपने संबोधन में डा. अशोक सम्राट ने कहा कि भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण सिखाते हैं कि कोई केवल शरीर को मार सकता है लेकिन आत्मा अमर है। मृत्यु के समय, आत्मा दूसरे शरीर में पुनर्जन्म लेती है या मोक्ष या निर्वाण प्राप्त करती है। गीता को योगशास्त्र माना जाता है जिसमें योग मार्ग द्वारा आत्मकल्याण के मार्ग को प्रशस्त करने का उपदेश दिया गया है। योग के अनेक अंग हैं लेकिन श्री कृष्ण ने कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग को ही कल्याण का प्रमुख साधन माना है। इस मौके पर प्रधान यशपाल सूरी, प्रेमनाथ तनेजा, मा. चेतनदास भटिया, हंसराज अनेजा, ओमप्रकाश जून, देवराज अरोड़ा व सुल्तान सिंह मौजूद थे।अयोध्या में मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के लिए तैयार: इसमें राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाने वाले 16 गुण झलकेंगे, 25 फीट दूर से दर्शन
सफीदों, वरिष्ठ नागरिक मित्र मंडल के तत्वावधान में नगर के नागक्षेत्र मंदिर में गीता शलोकोचारण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता डा. अशोक सम्राट ने की। संस्था के अध्यक्ष यशपाल सूरी ने आए हुए श्रद्धालुओं का अभिनंदन किया। डा. अशोक सम्राट ने गीता जयंती के उपलक्ष्य में वरिष्ठ नागरिकों को गीता के श्लोकों का पाठ करवाया। अपने संबोधन में डा. अशोक सम्राट ने कहा कि भगवद्गीता में भगवान श्री कृष्ण सिखाते हैं कि कोई केवल शरीर को मार सकता है लेकिन आत्मा अमर है। मृत्यु के समय, आत्मा दूसरे शरीर में पुनर्जन्म लेती है या मोक्ष या निर्वाण प्राप्त करती है। गीता को योगशास्त्र माना जाता है जिसमें योग मार्ग द्वारा आत्मकल्याण के मार्ग को प्रशस्त करने का उपदेश दिया गया है। योग के अनेक अंग हैं लेकिन श्री कृष्ण ने कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग को ही कल्याण का प्रमुख साधन माना है। इस मौके पर प्रधान यशपाल सूरी, प्रेमनाथ तनेजा, मा. चेतनदास भटिया, हंसराज अनेजा, ओमप्रकाश जून, देवराज अरोड़ा व सुल्तान सिंह मौजूद थे।अयोध्या में मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा के लिए तैयार: इसमें राम को मर्यादा पुरुषोत्तम बनाने वाले 16 गुण झलकेंगे, 25 फीट दूर से दर्शन
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