विकास से महरूम सफीदों का वार्ड 14, उपचुनाव से बदलेगी तस्वीर?

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गंदे पानी से लबालब वार्ड की एक गली
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बुनियादी सुविधाओं के अभाव में नारकीय जीवन जीने को मजबूर लोग

जानकारी देते हुए वार्ड की महिलाएं

सफीदों (एस• के• मित्तल) : नगर के वार्ड नंबर 14 का उपचुनाव होना है लेकिन यह वार्ड समस्याओं से घिरा हुआ है और विकास की बाट जोह रहा है। वार्ड में निकासी, पीने के पानी, टूटी फूटी गलियों, सफाई समेत अनेक समस्याएं मुंह बाए खड़ी है लेकिन समस्याओं के निराकरण के लिए कोई ठोस कार्य नहीं हो पा रहे हैं। विकास कार्य ना होने व समस्याओं को लेकर कालोनी वासियों में भारी रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि वे समस्याओं को लेकर अब तक के बने पार्षदों व संबंधित अधिकारियों को गुहार लगा चुके हैं, समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है। वार्डवासी ओमपति देवी, अंगुरी देवी, संतोष, माटो, धर्मबीर, सरोज, नेकी राम व लख्मी चंद का कहना है कि इस वार्ड में अनेक पार्षद बने लेकिन कोई भी धरातल पर विकास कार्य नहीं करवा पाया। ख्चुनावों के वक्त तो जनप्रतिनिधि बड़ी-बड़ी बातें करके वोट बंटोर जाते हैं लेकिन चुनाव जीत जाने के बाद उन वायदों को भुलाकर वार्ड वासियों को उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है। इस वार्ड की गलियां निकासी के अभाव में गंदे पानी से लबालब रहती हैं। नालियां गंदगी से अटी पड़ी है लेकिन उनको सफाई करके खोलने कोई नहीं आता। वार्ड की सिवरेज व्यवस्था भी ठप्प पड़ी है। थोड़ी सी बरसात में ही वार्ड की गलियां तालाब का रूप ले लेती हैं। बारिश का पानी उतरने के बाद वहां पर कीचड़ जमा हो जाता है व चारो ओर दुर्गंध फैल जाती है। बारिश का पानी उनके घरों में घुस जाता है। गंदगी के कारण वार्ड में महामारी फैलने का खतरा भी बना रहता है। गलियों में कीचड़ के कारण वाहन चालक, बच्चे व बुजुर्ग उनमें गिर जाते हैं। कालोनी के लोग नारकीय जीवन जीने पर मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि वार्ड की गलियां बहुत लंबे समय से टूटी फूटी पड़ी है, जिनकी सूध नहीं ली जा रही है। वार्ड की गलियों में स्ट्रीट लाईटें चालू नहीं है। जो लाईटे लगी भी हुई है तो वे चालू अवस्था में नहीं हैं। परिणामस्वरूप लोगों को अंधेरे में से होकर गुजरना पड़ता है। अंधेरे का लाभ उठाकर चोर-उचक्के भी अपना काम कर जाते हैं। वार्ड में अनेक स्थानों से पेयजल पाईप लाईनें टूटी हुई पड़ी है, जिसके कारण बदबूदार पानी पीने को मजबूर होना पड़ रहा है। यहां के निवासियों ने यह भी बताया कि इस वार्ड के युवाओं को बाहर से लोग आकर नशे के जंजाल में धकेलकर पथभ्रष्ट किया जा रहा है। ऐसे लोगों पर लगाम लगाए जाने की जरूरत है। कालोनी वासियों ने कहा कि वे इस उपचुनाव में केवल उसी को वोट देंगे जो उनकी सुनवाई करके समस्याओं का निपटान करवाएगा।

वार्डवासी

3 उम्मीदवारों ने भरा है नामांकन

सफीदों नगर पालिका के वार्ड नंबर 14 के उपचुनावों के मद्देनजर ज्योति, नीरू कुमार व अजीत ने अपने-अपने नामांकन पत्र दाखिल किए है। इन नामांकन पत्रों की जांच 18 फरवरी को होगी तथा नामांकन वापसी की तिथि 19 फरवरी निर्धारित की गई है। इसके बाद इसी दिन नामांकन दर्ज करने वाले उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह अलॉट कर दिए जाएंगे। उसके बाद आगामी 2 मार्च को यह उपचुनाव संपन्न होगा। इस चुनाव में हाथ आजमाने वाले सभी उम्मीदवार अपने-अपने स्तर पर वार्ड में विकास करवाने के दावे कर रहे हैं और विकास के मुद्दे पर लोगों से वोट के लिए संपर्क साध रहे हैं।

वार्डवासी
वार्डवासी

क्यों हो रहा है यह उपचुनाव

22 जून 2022 को सफीदों नगरपालिका चुनावों का परिणाम घोषित हुआ था। इस चुनाव के परिणामों में वार्ड नंबर 14 जोकि एससी के लिए आरक्षित था में रामभरोसे ने विजय हासिल की थी और अजीत पाथरी दूसरे स्थान पर रहे थे। चुनाव हारने के पश्चात प्रतिद्वद्धि अजीत पाथरी ने विजेता रहे रामभरोसे के जाति प्रमाण पत्र पर सवाल उठाते हुए कहा था कि रामभरोसे ने फर्जी प्रमाण पत्र तैयार करवाकर अपने नामांकन पत्र में उसे लगाया है। इस जाति प्रमाण पत्र में उसने अपनी जाति धानक दर्शायी है लेकिन उसकी सही जाति ताती है। अजीत का कहना है कि उसके पिता एफसीआई के कर्मचारी रहे हैं और वे बिहार से आकर सफीदों में बसे हुए है। पिता देबूदास की सर्विस बुक में उनकी जाति ताती है और रामभरोसे के स्कूली रिकार्ड में भी जाति ताती दर्ज है लेकिन उसने फर्जी आधार पर अपने जाति प्रमाण पत्र में अपनी जाति धानक दर्ज करवाई। अजीत पाथरी ने इस मामले की शिकायत चुनाव आयोग, उपायुक्त जींद व एसडीएम सफीदों को की थी। उच्चाधिकारियों ने इसकी जांच के आदेश पर सफीदों के नायब तहसीलदार को दिए थे। जांच के उपरांत दी गई रिपोर्ट में नायब तहसीलदार ने कहा था कि पार्षद रामभरोसे द्वारा गुरु गोबिंद सीनियर सैकेंडरी स्कूल सफीदों से शिक्षा ग्रहण की हुई है और वहां से प्राप्त रिकार्ड के मुताबिक रामभरोसे पुत्र देबूदास की जाति ताती बताई गई है। वहीं तात्कालीन पार्षदा राजबाला द्वारा रामभरोसे के जाति प्रमाण पत्र के प्रार्थना पत्र पर की गई जाति रिपोर्ट से भी यह स्पष्ट है कि उन्होंने बिना उचित जांच पड़ताल व बिना रामभरोसे के पुश्तैनी तहसील/ जिला से रिपोर्ट प्राप्त किए गलत जाति तसदीक की और ना ही उन्होंने रिपोर्ट में यह दर्शाया कि रामभरोसे के पिता देबूदास बिहार से आकर सफीदों में रह रहा है। अत: यह स्पष्ट है कि तात्कालीन नगर पार्षद द्वारा की गई रिपोर्ट (जाति तसदीक) गलत है। वहीं सचिव नगर पालिका सफीदों ने एफसीआई के रिया मैनेजर व एफसीआई के सफीदों प्रबंधक से पार्षद रामभरोस के पिता देबूदास की सेवानिवृत सर्विस बुक की रिपोर्ट प्राप्त की। इस रिपोर्ट के अनुसार राममरोसे के पिता देवूदास की जाति ताती है। यह स्पष्ट है कि जाति पिता से बच्चों को मिलती है। प्रबंधक भारतीय खाद्य निगम सफीदों से प्राप्त सूचना से यह स्पष्ट होता है कि रामभरोसे की जाति ताती है। वहीं कार्यवाही के दौरान पार्षद रामभरोसे को अपनी जाति (धानक) बारे तथ्य व सबूत पेश करने के बारे लिखा गया था लेकिन वह कोई पुख्ता सबूत व तथ्य पेश नहीं कर सका। इस मामले में दोनों पक्षों की सुनवाई के उपरांत राज्य चुनाव आयुक्त धनपत सिंह ने अपने फैसले में लिखा है कि रामभरोसे बिहार में तांती जाति से सम्बंध रखता है, जो हरियाणा राज्य में अनुसूचित जाति की सूची में सम्मिलित नहीं है। तांती जाति और धानक जाति अलग-अलग जातियां है। उसने गलत तथ्यों के आधार पर धानक जाति से संबंधित अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र जारी करवा लिया था, जो बाद में शिकायत होने पर संबंधित अधिकारी द्वारा निरस्त किया जा चुका है। सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुए भारत के संविधान के अनुच्छेद 243के और 243जेडए और हरियाणा नगरपालिका अधिनियम, 1973 की धाराओं के तहत निहित शाक्तियों का प्रयोग करते हुए रामभरोसे को नगरपालिका सफीदों के वार्ड नंबर 14 के पार्षद पद से हटाया जाता है और उक्त पद को तत्काल प्रभाव से रिक्त घोषित किया जाता है।

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