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कभी साइकिल का टोकन बांटते…आज हजारों का पेट भर रहे: पैसे नहीं थे तो सड़क से उठाकर खाया...अब 1000 लोगों को फ्री में खाना खिलाते हैं विशाल
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साल 2003… दिल्ली के रहने वाले विशाल के पिता विजय सिंह के फेफड़ों में इन्फेक्शन हो गया था। इलाज के लिए उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया। विशाल दिन-रात अपने पिता की देखभाल के लिए अस्पताल में भाग-दौड़ करते थे। वो दिन भर पिता के साथ रहते, रात में रैन बसेरे में जाकर सो जाते। धीरे-धीरे जमा किया हुआ सारा पैसा पिता के इलाज में खत्म होने लगा।

 

विशाल के पास खाना खाने तक के पैसे नहीं थे। कहीं कुछ खाने की

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