सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और चुनाव आयोग को भेजा नोटिस

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मुफ्त का लालच देने वाले दलों का रजिस्ट्रेशन हो रद्द
चुनाव चिह्न लिए जाएं वापस

एस• के• मित्तल
नई दिल्ली, पांच राज्यों के मौजूदा चुनावों में आम आदमी पार्टी समेत कई राजनीतिक दलों ने आम वोटरों को बिजली और अन्य सुविधाएं मुफ्त में देने का वादा किया है। किसान की कर्जमाफी तो हर चुनाव में बड़ा चुनावी आकर्षण रहा है। जिस पर पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका दाखिल की गई थी। जनहित याचिका दाखिल करते हुए याचिकाकर्ता ने जो पार्टियां मतदाताओं को मुफ्त में सुविधाएं देने के वादे कर रहे हैं उन राजनीतिक दलों के रजिस्ट्रेशन रद्द करने और उनके चुनाव चिंह जब्त करने की मांग की है। याचिकाकर्ता ने कहा कि राजनीतिक लाभ हासिल करने के लिए पब्लिक फंड से चुनाव से पहले वोटरों को लुभाने के लिए मुफ्त उपहार देने का वादा या मुफ्त उपहार बांटना स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव के खिलाफ है। यह वोटरों को प्रभावित करने और लुभाने का प्रयास है। इससे चुनाव प्रक्रिया प्रदूषित होती है।

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इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट सख्त हो गया है और आज इसे लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जनता के पैसे से मुफ्त में चीजें या सुविधाएं देने का चुनावी वादा करने वाली राजनीतिक पार्टियों के खिलाफ एक्शन लेने को लेकर गाइडलाइंस जारी करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के मुताबिक केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को तय करना है कि जो राजनीतिक पार्टियां चुनाव के दौरान जनता के पैसे से यानी पब्लिक फंड से मुफ्त घोषणाएं करती हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई को लेकर गाइडलाइंस तय हों। मुफ्त घोषणाएं करे वाली पार्टियों का रजिस्ट्रेश रद्द किया जा सकता है और उनका चुनावी चिन्ह भी जब्त हो सकता है।

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