श्रीमद् भागवत पठन व पाठन करने से होता है आध्यात्मिक विकास: शिवाकांत शुक्ल

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एस• के• मित्तल
सफीदों,    प्राचीन शिव मंदिर सेवा समिति के तत्वाधान में दादा खेड़ा के समीप स्थित श्री शिव मंदिर में संगीतमय श्रीमद् भागवत सप्ताह कथा रस वर्षण का आयोजन किया गया। इस समारोह में चित्रकुट से आए शिवाकांत शुक्ल ने व्यास पीठ से श्रद्धालुओं को श्रीमद् भागवत के गुढ रहस्यों अवगत करवाया। व्यास पीठ से श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए शिवाकांत शुक्ल ने कहा कि श्रीमद् भागवत पठन व पाठन करने से मनुष्य का आध्यात्मिक व बौद्धिक विकास होता है। श्रीमद् भागवत का आज की पीढ़ी को कथा सुनना बहुत ही जरूरी है। उन्होंने कहा कि आज की भागमभाग भरी जिंदगी में धार्मिक और नैतिक मूल्य कहीं गुम से हो गए हैं। ऐसे में लोगों को अपनी जड़ों की ओर वापस लौटना होगा। समाज के हर व्यक्ति को अपनी संस्कृति और धार्मिक मूल्यों को सहेजने और उसे लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रयास करना होगा। भगवान कृष्ण के वात्सल्य प्रेम, असीम प्रेम के अलावा उनकी विभिन्न लीलाओं का वर्णन करके वर्तमान समय में समाज में व्याप्त अत्याचार, अनाचार, कटुता, व्यभिचार को दूर किया जा सकता है।
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उन्होंने कहा कि रुक्मिणी स्वयं साक्षात लक्ष्मी हैं। वह नारायण से दूर रह ही नहीं सकतीं। यदि जीव अपने धन अर्थात लक्ष्मी को समाज कल्याण में लगाए तो ठीक नहीं तो फिर वह धन चोरी द्वारा, बीमारी द्वारा या अन्य मार्ग से हरण हो ही जाता है। धन को परमार्थ में लगाना चाहिए और जब कोई लक्ष्मी नारायण को पूजता है या उनकी सेवा करता है तो उन्हें भगवान की कृपा स्वत: ही प्राप्त हो जाती है। कथा समिति के प्रतिनिधि प्रवीन सैनी ने बताया कि रविवार 7 मार्च को भंडारे के साथ इस कथा महोत्सव का समापन होगा। उन्होंने श्रद्धालुओं से आह्वान किया कि वे कथा व भंडारे में बढ़-चढ़कर भाग लें।
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