महाशिवरात्रि का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व – डा• शंकरानंद सरस्वती

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भक्ति योग आश्रम में धूमधाम से मनाया गया महाशिवरात्रि महोत्सव का महत्व

एस• के• मित्तल
सफीदों,     उपमंडल के गांव सरनाखेड़ी स्थित भक्ति योग आश्रम में दो दिवसीय महाशिवरात्रि महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस समारोह में स्वामी डा. शंकरानंद सरस्वती का सानिध्य प्राप्त हुआ। वहीं साध्वी मोक्षिता व साध्वी अराधिका विशेष रूप से मौजूद रहीं। इस महोत्सव में विद्वान ब्राह्मणों द्वारा मंत्रोचारण के बीच भगवान मृत्युंजय महादेव की चारों पहर की पूजा की गई। वहीं रात्रि को शिव जागरण का आयोजन किया गया। जागरण में श्रद्धालु भक्तिमय गीतों पर जमकर झूमे। बुधवार सुबह विशाल हवन किया गया। हवन में क्षेत्रभर से जुटे श्रद्धालुओं ने अपनी आहुतियां डालकर क्षेत्र व परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। उसके उपरांत सुंदरकांड का संगीतमय पाठ हुआ। कार्यक्रम के समापन सत्र में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे में सैंकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया। अपने संबोधन में स्वामी डा. शंकरानंद सरस्वती ने कहा कि महाशिवरात्रि का पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व है।
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यूं तो हर महीने में शिवरात्रि आती है, लेकिन फाल्गुन मास में आने वाली महाशिवरात्रि का खास महत्व होता है। वास्तव में महाशिवरात्रि भगवान भोलेनाथ की आराधना का ही पर्व है। इस विशेष दिन ही ब्रह्मा के रूद्र रूप में मध्यरात्रि को भगवान शंकर का अवतरण हुआ था। इसी दिन भगवान शिव ने तांडव करके अपना तीसरा नेत्र खोला था और ब्रह्मानंड को इस नेत्र की ज्वाला से समाप्त किया था। इस पावन दिन भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था।
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