भारतीय संस्कृति की आधारशिला है गीता जी : गोपाल कौशिक

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एस• के• मित्तल      
सफीदों,        सनातन धर्म प्रचार महासभा के प्रांत प्रचारक गोपाल कौशिक यहां पर श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गीता जी भारतीय संस्कृति की आधारशिला है। हिंदू शास्त्रों में गीता का सर्वप्रथम स्थान है। गीता में अत्यंत प्रभावशाली ढंग से धार्मिक सहिष्णुता की भावना की प्रस्तुत किया गया है जो भारतीय संस्कृति की एक विशेषता है
। धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में कौरवों और पांडवों के मध्य युद्ध में अर्जुन अपने स्वजनों को देखकर युद्ध से विमुख होने लगा। धर्मयुद्ध के अवसर पर शोकमग्न अर्जुन को गीता का उपदेश देते हुए श्रीकृष्ण ने कहा कि व्यक्ति को निष्काम भाव से कर्म करते हुए फल की इच्छा नहीं करनी चाहिए। आत्मा की नित्यता बताते हुए श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा कि यह आत्मा अजर-अमर है। शरीर के नष्ट होने पर भी यह आत्मा मरती नहीं है। जिस प्रकार व्यक्ति पुराना वस्त्र उतार कर नया वस्त्र धारण कर लेता है, उसी प्रकार आत्मा भी पुराना शरीर छोड़कर नया शरीर धारण कर लेती है।
आत्मा को न तो शस्त्र काट सकते हैं, न अग्नि जला सकती है, न वायु उड़ा सकती है और न जल ही गीला कर सकता है। आत्मा को जो मारता है और जो इसे मरा हुआ समझता है, वह दोनों यह नहीं जानते कि न यह मरती है और न ही मारी जाती है। गीतानुसार हमें साधारण जीवन के व्यवहार से घृणा नहीं करनी चाहिए अपितु स्वार्थमय इच्छाओं का दमन करना चाहिए। अहंकार को नष्ट करना चाहिए। अहंकार के रहते हुए ज्ञान का उदय नहीं होता, गुरु की कृपा नहीं होती और ज्ञान ग्रहण करने क्षमना नहीं होनी। गीता के उपदेशों को सभी ने स्वीकृत किया है, अत: यह किसी सम्प्रदाय विशेष का ग्रंथ नहीं है।
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