बलिदान दिवस पर क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद को किया नमन

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एस• के• मित्तल
सफीदों, नगर के जींद रोड स्थित नंदी गौसेवा धाम प्रांगण में महान स्वतंत्रता सेनानी क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद के बलिदान दिवस की पूर्व संध्या पर उन्हें श्रद्धांजलि देकर नमन किया गया। इस मौके पर बतौर अतिथि विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष अरविंद शर्मा, समाजसेवी डा. केसी भट्टी व पूर्व बीईओ डा. नरेश वर्मा ने शिरकत की। कार्यक्रम की अध्यक्षता गौसेवा धाम के संचालक योगी दीपक चौहान ने की। अतिथियों ने शहीद चंद्रशेखर आजाद प्रतीमा पर पुष्पांजलि अर्पित करके उन्हे नमन किया। अपने संबोधन में अतिथियों ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद ऐसे देशभक्त सेनानी थे जिन्होंने लाहौर में अंग्रेज अफसर को मारकर लाला लाजपत राय की हत्या का बदला लिया था। चंद्रशेखर आजाद का असली नाम चंद्रशेखर तिवारी था और उनका जन्म 23 जुलाई 1960 को मध्यप्रदेश के अलीराजुपुर के भाबरा गांव में ब्राह्मण परिवार में हुआ था। काकोरी ट्रेन डकैती और साण्डर्स की हत्या में सम्मिलित निर्भीक क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद का नाम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में अहम स्थान रखता है। चंद्रशेखर आजाद ने यह प्रण लिया हुआ था कि वह कभी भी जीवित पुलिस के हाथ नहीं आएंगे। इसी प्रण को निभाते हुए एल्फ्रेड पार्क में 27 फरवरी 1931 को जब वह अपने साथी सुखदेव राज के साथ आगामी योजनाओं के विषय में विचार-विमर्श कर ही रहे थे कि पुलिस ने घेर लिया।
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आजाद ने अपनी जेब से पिस्तौल निकालकर पुलिस पर गोलियां दागनी शुरू कर दी। उन्होंने अपने सहयोगी सुखदेव को तो वहां पर से बाहर निकाल दिया परंतु खुद घेरे में ही फंसे रहे। जब उनकी पिस्तौल में आखिरी गोली रह गई तो वे पेड़ के पीछे छिप गए तथा अपने आप पर आखिरी गोली चलाकर शहीद हो गए। इस मौके पर विश्व हिंदू परिषद के जिला उपाध्यक्ष अरविंद शर्मा, समाजसेवी डा. केसी भट्टी, पूर्व बीईओ डा. नरेश वर्मा, योगी दीपक चौहान, गौरव शर्मा, सन्नी सैनी, मनीष भारद्वाज, संदीप सिंघाना, अमर व साहिल मौजूद थे।
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