कोरोना के कारण मां बाप खोने वाले बच्चों के पालन पोषण में सहायता कर रही सरकार : डीसी

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पीएम केयर के तहत जरूरतमंद पात्र बच्चों को 10 लाख रुपये का कोष

एस• के• मित्तल
जींद, कोरोना की महामारी के कारण अपने माता पिता को खो चुके बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए प्रदेश की मनोहर सरकार कटिबद्ध है और मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत ऐसे बच्चों के पालन पोषण में सराहनीय मदद की जा रही है। डीसी नरेश नरवाल ने योजना की जानकारी देते हुए बताया कि कोरोना की महामारी से अपने माता पिता को खो देने वाले बच्चों की मदद के लिए हरियाणा में मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना शुरू की गई है और इस योजना के तहत अनाथ हुए बच्चों को 18 वर्ष तक 2500 रुपये मासिक आर्थिक सहायता प्रदान करने का निर्णय लिया है, जिससे उनकी पढ़ाई भी प्रभावित नहीं होगी। योजना के तहत बाल सेवा संस्थान में रहने वाले बच्चों के आवर्ती जमा खाते खोले जाएंगे, जिसमें 18 वर्ष की आयु तक 15 सौ रुपए जमा करवाने का प्रावधान किया गया है। इन बच्चों को सरकार ने अन्य खर्चों के लिए 12 हजार रुपये वार्षिक देने का निर्णय भी लिया है। किशोरियों को कस्तूरबा गांधी बाल विद्यालय में नि:शुल्क स्कूली शिक्षा दी जाएगी। इसके अतिरिक्त किशोरियों के खाते में 51 हजार रुपए जमा किए जाएंगे तथा विवाह के समय ब्याज सहित शगुन दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि कोरोना की बीमारी के चलते बच्चों के माता-पिता अथवा उनमें से किसी एक के निधन होने से बच्चों के लालन-पालन पर असर पडऩा स्वाभाविक है। ऐसे बच्चों की सहायता के लिए मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत सरकार उनकी देखभाल करेगी। सरकार द्वारा जारी हिदायतों के अनुसार मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए 222.2ष्स्रद्धह्म्4.द्दश1.द्बठ्ठ अथवा 222.ष्स्रद्धह्म्4.द्दश1.द्बठ्ठ पर भी आवेदन किया जा सकता है। डीसी ने बताया कि मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत 10 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए स्कूली शिक्षा में नजदीकी केन्द्रीय विद्यालय/निजी स्कूल में डे-स्कालर के रूप में दाखिला तथा निजी स्कूल में दाखिला के लिए पीएम केयर्स से आरटीई के तहत फीस, वर्दी, पाठ्यक्रमों व नोटबुक की सुविधा प्रदान की जाती है। इसी प्रकार 11 से 18 वर्ष की आयु के बच्चों के लिए स्कूली शिक्षा के दौरान किसी भी आवासीय विद्यालय जैसे सैनिक स्कूल, नवोदय विद्यालय, इत्यादि में दाखिला, निजी स्कूल में दाखिले के लिए पीएम केयर से आरटीई के तहत फीस, वर्दी, पाठ्यक्रमों व नोटबुक की सुविधा दी जाती है।
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इसके अतिरिक्त ऐसे सभी बच्चों को आयुष्मान भारत योजना के तहत स्वास्थ्य बीमा के तहत 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जाएगा तथा 18 वर्ष की आयु तक के इन बच्चों के प्रीमियम की राशि का भुगतान पीएम केयर द्वारा किया जाएगा। बाल संरक्षण अधिकारी ने बताया कि योजना के तहत 18 वर्ष तक 2500 रुपये प्रति बच्चा प्रति महीना, बिना परिवार के बच्चों की देखभाल करने वाले बाल देखभाल संस्थान को 1500 रुपये प्रति बच्चा प्रतिमास 18 वर्ष तक की आयु तक, अन्य पूरा खर्चा बाल देखभाल संस्थान द्वारा वहन किया जाएगा। इसी प्रकार 18 वर्ष तक पढ़ाई के दौरान प्रतिवर्ष 12000 रुपये अन्य खर्चों के लिए भी सरकार द्वारा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि 8वीं से 12वीं या व्यावसायिक पाठ्यक्रम में किसी भी कक्षा में पढऩे वाले बच्चों को टेबलेट की सुविधा भी प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि 18 वर्ष की आयु पूरी करने पर पीएम केयर्स द्वारा 10 लाख रुपये का कोष, 18 वर्ष की आयु से अगले 5 वर्षों तक उच्च शिक्षा की अवधि के दौरान मासिक वित्तीय सहायता/छात्रवृत्ति तथा 23 वर्ष की आयु पूरी करने पर बच्चे को व्यक्ति और व्यावसायिक उपयोग के लिए एकमुश्त राशि दी जाएगी। कोरोना महामारी के कारण माता पिता को खो देने वाले बच्चे व उनके परिजन जल्द से जल्द बच्चों के माता-पिता का ब्यौरा महिला एवं बाल विकास अधिकारी अथवा जिला बाल संरक्षण अधिकारी कार्यालय में जमा करवाएं ताकि उन्हें समय रहते योजना का लाभ मिल सके।
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