करनाल में कोठियों के मालिक बने आयुष्मान लाभार्थी: ढिंढोरा पीटने की होड़ में गरीब का हक मार रहे अमीर, सरकार के पारदर्शी सुशासन में सुराग

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  • करनाल में अटल सेवा केन्द्र पर लगी लाइनो का दृश्य।

बड़े स्तर पर BPL कार्डों में फर्जीवाड़े का सेहरा बांधने वाली CM सिटी में अब आयुष्मान कार्ड में भी बड़ी गड़बड़ी उजागर हुई है। कार, पक्के मकान मालिकों और सरकारी मुलाजिमों ने गरीबों के हक को मार कर सरकार के पारदर्शी सिस्टम को चुनौती देकर आज आयुष्मान कार्ड होल्डर बन गए है।

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वाहवाही बटोरने के लिए 21 नवंबर को प्रदेश सरकार ने गरीबों को 5 लाख की स्वास्थ्य सुविधा देते हुए आयुष्मान कार्ड वितरित किए हैं। इसी के तहत करनाल में इस योजना की शुरुआत करते हुए जिले में 400 लोगों को कार्ड बांटे गए। गरीबों के लिए सरकार की यह योजना अच्छी है और सरकार का प्रयास भी काबिले तारीफ है लेकिन अनदेखी के चलते जमीदारों के नाम भी आयुष्मान कार्ड के लिस्ट में शामिल हो चुके हैं।

लिस्ट खंगाली तो उजागर हुआ मामला

दैनिक भास्कर के प्रतिनिधि रिंकू नरवाल ने जब मामले की सच्चाई जानने के लिए लिस्ट खंगाली तो उसने ऐसे नाम भी पाए गए जो कार, कोठी, खेत के मालिक और सरकारी मुलाजिम थे। गरीबों के नाम पर इतनी बड़ी चोरी होने पर अब आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों का प्रतिनिधित्व करने वाली सरकार की पारदर्शिता पर सवाल उठा रहे हैं। या अब यूं कहे कि जल्दबाजी में आयुष्मान कार्ड धारकों की धरातल पर जांच नहीं की गई, या फिर संसाधनों की अनदेखा कर लोगों को आयुष्मान कार्ड बांटे गए।

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परिवार पहचान पत्र में इनकम की सच्चाई पर सवाल

डिजिटल युग में प्रदेश सरकार की ओर से प्रत्येक व्यक्ति का डाटा और आमदनी को ऑनलाइन किया गया है। इसी के चलते कई गरीब बुजुर्गों को वृद्ध सम्मान भत्ते से भी वंचित होना पड़ा है। बतादे कि परिवार पहचान पत्र में दी गई आमदनी को जांचने के लिए स्थानीय स्तर पर डोर टू डोर जांच भी की गई बावजूद इन संसाधन युक्त अमीरों की कारगुजारी पर पर्दा डाल दिया गया। अब सिस्टम की खामियों का नतीजा यह निकला कि आज गरीबों के हक पर अमीर लोग 5 लाख रुपए की स्वास्थ्य सेवा का लाभ लेने में कामयाब हो गए। अब सरकार की पूर्व में की गई बार-बार गलतियों ने एक बार फिर से मिलीभगत का नया उदाहरण पेश किया है।

400 में से 100 की आमदनी पर संदेह

एडवोकेट अरविंद मान ने बताया कि प्रदेश सरकार द्वारा जो आयुष्मान की लिस्ट जारी की गई है उसमें करनाल जिले में 400 लाभार्थियों के नाम है इन चारों में से जो लोग तो ऐसे है जो सभी चीजों से संपन्न हैं इन 100 लोगों ने गरीबों के हक पर डाका डाला है। जबकि जो लोग इस आयुष्मान कार्ड के असली लाभार्थी होने चाहिए थे वह आज भी सरकारी कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार व प्रशासनिक अधिकारियों को चाहिए कि इस लिस्ट को एक बार दोबारा चेक किया जाए और जिन लोगों के नाम इस लिस्ट में शामिल किए गए हैं उनकी संपत्ति व उनकी आमदनी को दोबारा जांच आ जाए ताकि गरीबों के हक पर डाका न डाला जा सके।

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ये लोग बनवा सकते हैं आयुष्मान कार्ड

​​​​​​​आयुष्मान कार्ड सिर्फ उन लोगों का बन सकता है जिनका अगर मकान कच्चा है, अगर परिवार में कोई दिव्यांग सदस्य है, अगर कोई भूमिहीन व्यक्ति है, अगर कोई अनुसूचित जाति या जनजाति से आता है, अगर कोई दिहाड़ी मजदूर हैं, अगर कोई ग्रामीण क्षेत्र में रहता है और अगर कोई निराश्रित या आदिवासी आदि है।

सरकारी योजना में खामियां बर्दाश्त नहीं

ADC वैशाली ने बताया कि किसी भी सूरत में सरकारी योजना में खामियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। विभागीय स्तर पर लगभग आयुष्मान कार्ड आर्थिक तौर पर कमजोर लोगों को ही दिए गए हैं। अगर इस मामले में कोई शिकायत आती है तो मामले की जांच की जाएगी। अगर कोई इसमें दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई उनकी तरफ से अमल में लाई जाएगी

 

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