इरा फाऊंडेशन ने धूमधाम से मनाया गया लोहड़ी पर्व

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खुशहाली का महापर्व है लोहड़ी: गीतांजली कंसल
एस• के• मित्तल
सफीदों,    नगर की सामाजिक संस्था इरा फाऊंडेशन के तत्वावधान में लोहड़ी का पर्व धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता फाऊंडेशन की अध्यक्षा सुदेश भारद्वाज ने की। वहीं बतौर मुख्यातिथि समाजसेविका गीतांजली कंसल ने शिरकत की। इस मौके पर एकत्रित हुई महिलाओं ने अलाव जलाकर लोहड़ी के गीत गाए और जमकर सामुहिक नृत्य किया। अपने संबोधन में मुख्यातिथि गीतांजली कंसल ने कहा कि लोहड़ी से जुड़ी प्रमुख लोककथा दुल्ला भट्टी की है जो मुगलों के समय का एक बहादुर योद्धा था। जिसने मुगलों के बढ़ते जुल्म के खिलाफ कदम उठाया था। एक ब्राह्मण की 2 लड़कियों सुंदरी व मुंदरी के साथ इलाके का मुगल शासक जबरन शादी करना चाहता था। इस मुसीबत की घड़ी में दुल्ला भट्टी ने ब्राह्ममण की मदद की और लड़के वालों को मनाकर एक जंगल में आग जलाकर सुंदरी-मुंदरी का ब्याह कराया। दुल्ले ने खुद ही उन दोनों का कन्यादान किया।
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इसके अलावा इसी दिन से नए साल का पहला दिन भी शुरू होता है। लोहड़ी की कथा भगवान शिव और आदिशक्ति मां सती से जुड़ी है। पौराणिक कथा है कि मां सती और भगवान शिव के विवाह से प्रजापति दक्ष प्रसन्न नहीं थे। कालांतर में एक बार प्रजापति दक्ष ने महायज्ञ का आयोजन किया। इस आयोजन में प्रजापति दक्ष ने भगवान शिव और पुत्री सती को आमंत्रित नहीं किया। उस समय मां सती ने पिता के यज्ञ में जाने की इच्छा भगवान शिव से जताई। साथ ही अनुमति भी मांगी। तब भगवान शिव ने मां सती से कहा-बिना आमंत्रण के किसी घर पर जाना उचित नहीं होता है। सती के न मानने पर भगवान शिव ने उन्हें जाने की अनुमति दे दी। जब मां सती अपने पिता के यज्ञ में शामिल होने पहुंची, तो वहां भगवान शिव के प्रति कटु और अपमानजनक शब्द सुनकर मां सती बेहद कुंठित हुई। उस समय मां सती पिता द्वारा आयोजित यज्ञ कुंड में समा गईं। यह पर्व नवीन फसल की तैयारी में मनाई जाती है। अत: यह खुशहाली का पर्व है। इस मौके पर ज्योति, निशा, रेखा, सीमा, मीनाक्षी, पारुल व मधु के अलावा काफी तादाद में महिलाएं मौजूद थीं।
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